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कोरबा जिला में पांच दिनों तक बारिश की संभावना…..

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मौसम विज्ञान विभाग ने कोरबा जिले में आगामी 5 दिनों तक बारिश की संभावना जताई है. कई स्थानों पर हल्की तो कुछ स्थानों पर तेज बारिश की भी संभावना है. इसको लेकर एडवाइजरी जारी की गई है.

मौसम विज्ञान विभाग (Department of Meteorology) ने जिले में आगामी पांच दिनों तक बारिश की संभावना जताई है. कई स्थानों पर हल्की तो कुछ स्थानों पर तेज बारिश की भी संभावना है. ऐसे में किसानों की फसल पर कीट तना छेदक के प्रकोप की भी संभावना है, जिसे बचाने के लिए विभाग ने सुझाव जारी किया है.

इस तरह रखना है फसलों का ध्यान

मौसम विज्ञान विभाग की ओर से बागवानी, पशुपालन, मुर्गी पालन व मृदा की तैयारी के लिए मौसम आधारित कृषि सलाह भी जारी किए गए हैं. इसके अंतर्गत पपीते में फल झड़न को रोकने के लिए 20 पीपीएम की दर से नेप्थलीन एसिटीक एसिड का छिड़काव करने कहा गया है. जून में रोपित मुनगे की फसल एवं पिछले वर्ष रोपित आम के पौधों में सधाई के लिए कांट-छांट करने के सलाह दिये गए हैं. धान की फसल में झुलसा रोग के लक्षण नाव आकार के धब्बे के रूप में दिखते ही ट्राई साइक्लोजोल 0.6 ग्राम प्रतिलीटर पानी का छिड़काव की सलाह दी गई है. धान में तना छेदक कीट की निगरानी के लिए फिरोमेन ट्रैप 2-3 प्रति एकड़ का उपयोग करने एवं प्रकोप पाए जाने पर 8-10 फिरोमेन ट्रेप का उपयोग करने कहा गया है. किसानों को धान फसल नहीं लगाने की स्थिति में कुल्थी, मूंग, उड़द, मक्का, सब्जी एवं चारे वाली फसलों की बुआई कर सकते हैं.

सितंबर माह में बकरियों को एंटोरोटॉक्सीमिया नाम की बीमारी का टीका लगवाने के लिए कहा गया है. बताया गया है कि बढ़ते मेमनों को छह से 10 सप्ताह की उम्र में इस बीमारी का टीका लगवाना चाहिए. वहीं मुर्गियों में खूनी दस्त से बचाव के लिए 30 ग्राम वर्मिक्स पाउडर पानी में मिलाकर तीन से पांच दिनों तक पिलाने के निर्देश जारी किए गए हैं. फल एवं सब्जी के खेतों में पानी भरे स्थान में जल निकास की व्यवस्था करने की सलाह दी गई है.

इस दौरान जिले में अधिकतम तापमान लगभग 33 डिग्री सेल्सियस तो न्यूनतम 24 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है. किसानों को रोपा किए गए खेतों में पांच सेन्टीमीटर से अधिक पानी नहीं भरने देने, पानी अधिक होने पर तत्काल खेत से बाहर निकालने के निर्देश दिए गए हैं. दलहनी एवं तिलहनी फसलों में जल निकास की व्यवस्था करने के लिए भी कहा गया है. सितंबर माह के दौरान धान के फसल में तना छेदक, भूरा माहो एवं गंगई कीट प्रकोप होने की संभावना रहती है. इसको ध्यान में रखते हुए किसानों की फसलों की सतत निगरानी करने एवं कीट नियंत्रण के लिए प्रारंभिक अवस्था में प्रकाश प्रपंच या समन्वित कीट नियंत्रण विधि का प्रयोग करने के लिए कहा गया है. कीट प्रकोप अधिक होने की स्थिति में मौसम खुलते ही अपने क्षेत्र के कृषि अधिकारी से संपर्क कर कीटनाशी दवा का छिड़काव करने की सलाह दी गई है

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