
25 मई 2013 को झीरम घाटी में हुए कांग्रेस नेताओं के नरसंहार मामले में जस्टिस प्रशांत मिश्रा आयोग की जांच आठ साल बाद भी अधूरी है। जस्टिस प्रशांत मिश्रा आयोग ने जांच पूरी करने के लिए राज्य सरकार से और वक्त की मांग की थी। लेकिन राज्य सरकार ने इसके लिए मना कर दिया।
यह जानकारी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मंगलवार को मीडिया को दी है। उन्होंने कहा कि जस्टिस प्रशांत मिश्रा आयोग के सचिव ने आयोग के कार्यकाल बढ़ाने के लिए राज्य सरकार को पत्र लिखा था। लेकिन राज्य सरकार ने नहीं बढ़ाया। इसका मतलब है कि आयोग का कार्यकाल समाप्त हो गया है और जो रिपोर्ट उन्होंने राज्यपाल को सौंपी है, वह अधूरी है। आज तक जितने भी आयोग की रिपोर्ट आई है। वह राज्य सरकार के पास आई है। ये नई परिपाटी चला रहे हैं।
सीएम भूपेश ने आगे कहा कि भारतीय जनता पार्टी परिपाटी के हिसाब से नई परंपरा चला रही है, जो प्रजातंत्र है वह संविधान के हिसाब से चलता है। राज्यपाल आखिर क्या करेगी ? राज्यपाल राज्य सरकार को ही सौंपेगी न ! कि वहीं रखे रहेंगी। राज्यपाल अपनी टिप्पणी के साथ राज्य सरकार को रिपोर्ट सौंपे, ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। आयोग की रिपोर्ट राज्य सरकार सौंपती है और एक्शन रिपोर्ट के साथ विधानसभा में प्रस्तुत किया जाता है। जब तक इसमें कोई दूसरा अध्यन नहीं कर सकता। कोई कुछ बोल नहीं सकता। यह गोपनीय है और जो संपत्ति विधानसभा की है, जिसे वहां प्रस्तुत किया जाना है, उसे बाहर खोला जा सकता है ?


