
श्री विनोद कुमार टण्डन जी को मिली पी.एच.डी उपाधि श्री विनोद कुमार टंडन जी का जन्म 12 जुलाई 1981 , ग्राम – जैतपुर ( सरसीवा ) जिला – बलौदा बाजार , छत्तीसगढ़ में हुआ । विनोद जी ने ग्रामीण पृष्ठ भूमि के होते हुए भी उच्च शिक्षा प्राप्त की , वे श्रीमती रामेश्वरी देवी ( गृहिणी ) एवं सेवानिवृत्त गामीण कृषी विस्तार अधिकारी श्री ० भागवत टण्डन के पुत्र है । उन्होंने अपना प्राथमिक शिक्षा फिंगेश्वर जिला गरियाबंद में , माध्यमिक शिक्षा पटेवा , महासमुंद में , स्नातक छत्तीसगढ़ महाविद्यालय ( रायपुर ) से एवं स्नातकोत्तर लोक प्रशासन विषय से पं . रविशंकर शुक्ला विश्वविद्यालय से पूर्ण किये । इससे अतिरिक्त UGC नेट – जे ० आर ० एफ के भी अर्हता प्राप्त है । विनोद कुमार जी संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा उत्तीर्ण कर 2004 बैच के प्रथम श्रेणी के सहायक कमाण्डेन्ट के रूप में सिधे नियुक्त अधिकारी है एवं वर्तमान में केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल में डिप्टी कमाण्डेन्ट के रूप में ओडिशा राज्य में कार्यरत है । विनोद जी पंडित रविशंकर शुक्ला विश्वविद्यालय , रायपुर से राजनीति विज्ञान में पीएचडी की उपाधि हासिल की है । अधिकारी ने शोध केन्द्र एस.आर.सी. एस . कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय , दुर्ग ( छ.ग. ) से अपने शोध कार्य पूर्ण किया और 30 जुलाई को मौखिक परीक्षा में भाग लेने के बाद अंततः पीएचडी डिग्री प्राप्त की । अधिकारी ने अपने शोध के लिए एक बहुत ही चुनौतीपूर्ण विषय चुना जो न केवल वास्तविक समय की जानकारी के साथ – साथ तथ्यात्मक डेटा एकत्र करने में जोखिमभरा है बल्कि बल में सेवारत साहसी अधिकारियों की पेशेवर क्षमता के लिए एक उपयोगी उपकरण भी है । अधिकारी ने ‘ छत्तीसगढ़ राज्य में नक्सलवाद के उन्मूलन में पुलिस प्रशासन की भूमिका का विश्लेषण ( सुकमा जिले के विशेष संदर्भ में ) पर अपना शोध डॉ अलका मेश्राम , प्राचार्य , शासकीय कला और वाणिज्य स्नातकोत्तर महाविद्यालय वैशालीनगर , भिलाई ( छ.ग. ) के निर्देशन में तथा डॉ डी.एन. सुर्यवंशी , सेवानिवृत्त प्राचार्य , एस.आर.सी.एस. कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय , दुर्ग ( छ.ग. ) के सह – पर्यवेक्षण में संपन्न किया । विनोद जी ने 2005 में बेसिक प्रशिक्षण उपरान्त उन्होंने देश के विभिन्न उग्रवाद , आतंकवादग्रस्त क्षेत्रों जैसे मणिपुर , त्रिपुरा , उडिसा , आसाम , जम्मू एवं काश्मीर में अपनी सेवाएं दी है । उन्होंने 18 साल की सेवा अवधि में भारत के घोर नक्सल प्रभावित राज्य छत्तीसगढ़ में 09 साल प्रति नक्सलवाद के कर्तव्यों का निर्वाहन किया है और अपने इन्हीं कार्यानुभयों के कारणों से नक्सलवाद जैसे ज्वलन्त मुद्ये को अध्ययन के रूप में चूना जिसमें देश की इस भयानक समास्या को दूर करने के लिए कई उपयोगी विचार सामने आए हैं ।

